चूहे की सवारी ही क्यों करते हैं गणेश जी? आखिर इसमें छिपा है कौन सा संदेश? Ganesh Chaturthi 2022
चूहे की सवारी ही क्यों करते हैं गणेश जी? आखिर इसमें छिपा है कौन सा संदेश? Ganesh Chaturthi 2022
लेकिन मेरे भतीजे का कहना है कि मूषक चूहा नहीं, बल्कि मूस है। चूहे घिनौने होते हैं, जबकि मुंस उनसे कहीं ज्यादा प्यारे होते हैं। प्यारे गणेश एक प्यारे मूस पर सवार होते हैं। सच में तो कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि मूषक मूस है या चूहा। विद्वान और अन्य लोग इसके बारे में गुढ संस्कृत ग्रंथों का उल्लेख करते हुए अंतहीन बहस भी करते हैं। जो भी हो, वह मूलतः एक कृतंक है, जिसके द्वारा अनाज खाने की वजह से किसान उसे अपना दुश्मन मानते हैं। गणेश मंगल-मूर्ति हैं अर्थात सभी शुभ बातों के मूर्त रूप। फिर एक कृतंक, जो इतना अशुभ माना जाता है, उनकी सवारी कैसे हो सकता है? तो इसमें क्या संदेश छिपा है?
मूषक उस कृतंक का प्रतीक है, जो हमारे जीवन में लगातार बना रहता है। यह उस समस्या का प्रतीक है जो इतनी छोटी है कि उसका पता लगाना भी मुश्किल है और जो हमें परेशान करती है। यह समस्या उस प्रेजेंटेशन जैसी है, जो हमारा बॉस कभी मंजूर नहीं करेगा; उस मुंहासे जैसी जो हमारी नाक में दम कर देता है; उस पड़ोसी जैसी जो हमेशा कचरा आपके दरवाजे के बाहर रखता है; या उस टपकते हुए नल जैसी जिसका किसी नलसाज के पास भी हल नहीं है। यह चाबियों का वह गुच्छा है, जो आपको घर से निकलते समय नहीं मिलता; या न्यायालय में वह मुकदमा है जो सालों से चल रहा है। यह हमारे जीवन के कृतंक हैं, लोभी चोर जो हमारे सुख को कुतर रहे हैं।
ऐसे व्यक्ति की कल्पना कीजिए जो आपके जीवन की सभी तकलीफदेह, चूहों जैसी समस्याएं हल करता है। हिंदुओं के लिए वे गणेश हैं। गणेश के विशाल पेट के चारों ओर एक नाग लपटा होता है। नाग चूहों को खाता है, जिस कारण अनाज कम खाया जाता है और फसल सुरक्षित रहती है। इसलिए नाग किसान का मित्र है।
गणेश की कृपा से समस्याएं दूर होती हैं और लोग समृद्ध व शक्तिशाली बनते हैं। हम सहजता से गणेश की कल्पना कर सकते हैं, उन्हें चूहा या मूस रूपी समस्या को उसकी पूंछ से पकड़कर उसे घसीटते और उस पर बैठते हुए, ताकि वह हमें और परेशान ना करें। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि गणेश बहुत लोकप्रिय देवता हैं, जो हमें तंग करने वाले चूहों से राहत दिलाते हैं। वह विघ्नों को दूर करने वाले अर्थात विघ्नहर्ता है। चूहे तेजी से प्रजनन करते हैं और परिणामस्वरूप उर्वरता के प्रतीक भी हैं। गणेश हमेशा उर्वरता के प्रतीकों से जुड़े हैं। उदाहरणार्थ, दूर्वा या दूब घास जो उखाडने के बाद भी बढ़ती है। यदि पौधों में उर्वरता का प्रतीक दूर्वा है। तो जानवरों में चूहा उस का प्रतीक है। चीन और जापान में चूहों को उर्वरता, बच्चों और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
चूहे अथक होते हैं। अनाज तक पहुंचने के लिए वे सबसे मुश्किल बाधाओं को भी पार कर लेते हैं। इसलिए वे लोभ के प्रतीक भी हैं। वे अथक जमाखोर हैं। इस प्रकार चूहों के दोनों सकरात्मक (उर्वरता/अथक होना) और नकारात्मक (चोरी करना/महामारी फैलाना) पहलू होते हैं। गणेश के मूषक के ऊपर विराजमान होने से भक्तों तक केवल सकारात्मक पहलू पहुंचते हैं, जबकि नकारात्मक पहलू उनसे दूर रहते हैं।
गणेश की प्रतिमा संभवत: समृद्धि, शक्ति और शुभता की भावनाएं जगाती हो, जिन्हें हासिल करने के लिए उर्वरता महत्वपूर्ण है। लेकिन उनका मूषक हमें आत्मसंतुष्ट न बनने की याद दिलाता है: चूहा भले ही उर्वर और अजेय हो और हमारे धनी बनने में योगदान करता हो, लेकिन वह चुपचाप, गुप्त रूप से हमारी नैतिकता, हमारे मूल्यों और स्पष्टतया हमारे पूर्ण जीवन की नींव को कुतरने में भी सक्षम है।
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी से इन 4 राशि वालों के शुरू होने जा रहे हैं अच्छे दिन, मां लक्ष्मी का भी मिलेगा आशीर्वाद!
Ganesh Chaturthi 2022: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 31 अगस्त को शुक्र का सिंह राशि के साथ युति होने वाली है. इस दिन गणेश चतुर्थी भी है. ग्रहों की युति का विशेष लाभ कुछ राशियों को मिल सकता है.
Ganesh Chaturthi 2022: Shukra Rashi Parivartan: ज्योतिष में शुक्र को शुभ ग्रह माना गया है. इसे ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि, धन, प्रेम, वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है. ये वृषभ और तुला राशि के स्वामी हैं. मीन राशि में ये उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच के माने गए हैं. ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार 31 अगस्त, बुधवार को शुक्र का गोचर (Shukra Gochar 2022) होने जा रहा है. इस दिन गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) भी मनाई जाएगी. गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2022) के दिन शुक्र देव कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि (Leo Zodiac) में प्रवेश करेंगे. ऐसे में गणेश चतुर्थी के दिन शुक्र का राशि परिवर्तन (Shukra ka Rashi Parivartan) बेहद खास माना जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र के जानकारों की मानें तो गणेश चतुर्थी के दिन से कुछ राशि वालों के अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं. आइए जानते हैं कि ये राशियां कौन-कौन हैं
मेष
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक मेष राशि के लिए शुक्र का गोचर लाभकारी साबित होगा. शुक्र गोचर की अवधि में सुख-समृद्धि के साथ-साथ खुशियां प्राप्त होंगी. पिता से आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा. परिवार के किसी सदस्य से कोई उपहार मिल सकता है. आर्थिक निवेश के लिए समय अनुकूल रहने वाला है
वृषभ
इस राशि से संबंधित जातकों के लिए शुक्र का राशि परिवर्तन खास साबित होने वाला है. शुक्र गोचर की पूरी अवधि में आर्थिक रूप से तरक्की होगी. साझेदारी वाले काम में आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. इसके साथ ही इस दौरान मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो सकती है. संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है.
सिंह
शुक्र का राशि परिवर्तन सिंह राशि के लिए खास रहेगा. इस दौरान जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा. शुक्र गोचर की अवधि में नए जॉब का ऑफर मिल सकता है. जो लोग नौकरी में उनकी सैलरी में वृद्धि हो सकती है. आर्थिक स्थिति पहले से सुदृढ़ होगी. करियर तरक्की का अवसर मिलेगा.
कुंभ
शुक्र को गोचर से कुंभ राशि के जातकों के जीवन में खुशियां आएंगी. गोचर की अवधि में दांपत्य जीवन सुखद रहेगा. बिजनेस में आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी. ऐश्वर्य के साधनों की वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में तरक्की हासिल कर सकते हैं. अधिकारियों का सकारात्मक सहयोग मिलेगा. व्यापारियों के कामकाज को गति मिल सकती है.
विचारों की नवीनता में छिपी वृंदावन की सुगंध
इस घटना पर थोड़ा चिंतन करें। इसे हम हद की बेइंतेहा ही कहेंगे। इस तरह की घटना पाकिस्तान में ना तो पहली है और ना ही अंतिम।
तालाब और नदी के पानी में काफी अंतर होता है। तालाब का पानी बह नहीं सकता, दूसरी और नदी का पानी लगातार बहता ही रहता है। बहता पानी निर्मल। कालचक्र कभी विपरीत दिशा में नहीं घूमता। इसमें रिवर्स गियर भी नहीं होता। परिणामस्वरूप विचारों में भी बदलाव आते रहते हैं। विचारों की नित्य-नूतनता में ही विचारों के वृंदावन की सुगंध छिपी होती है। कुछ भी अंतिम नहीं होता। फाइनल नहीं होता। यही 'फाइनलिटी' भी मजहब की दुश्मन बन सकती है।
समय के साथ चलते हुए किसी भी मजहब रूपी जलाशय में जमी हुई काई को दूर करने के लिए राजा राममोहन राय, वीर नर्मद, दुर्गाराम मेहता जैसे समाज सुधारक आते हैं। ऐसा ना हो तो धर्म में बासीपन आ जाता है, उसे आसानी से दूर नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान जैसे आतंक प्रदेश में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो खुलकर बोलते हैं। इनमें एक व्यक्ति है हसन निसार। मैंने टीवी पर हसन भाई को बारंबार सुना है। यहां पर हसन भाई के कुछ क्रांतिकारी विचारों को रख रहा हूं।
पाकिस्तान ने मिसाइल कार्यक्रम तैयार किया। उसने उसके नाम कैसे रखे? एक का नाम गौरी मिसाइल और दूसरी का गजनी मिसाइल। इतिहास के पन्नों में यह दोनों तो जंगली लुटेरे माने जाते हैं। ऐसे नाम पाकिस्तान की युवा पीढ़ी को किस तरह से प्रेरणा देंगे? पाकिस्तानी शासकों के सुधरने के कोई लक्षण नहीं है। पर हम आम लोग तो इस पर विचार कर ही सकते हैं।
पाकिस्तान में बड़े-बड़े जमींदारों नें जमीनों पर कब्जा जमा लिया है। उनकी संतानें अमेरिका-यूरोप में पक्षिमी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यह धर्म के नाम पर उत्पात मचा रहे हैं। आप ही बताएं, ऐसे देश का क्या होगा?
भारत पाकिस्तान जैसे दो पड़ोसी देशों के बीच तो अमेरिका कनाडा जैसा संबंध होना चाहिए। भारत-पाकिस्तान के बीच जो सामान्य व्यापारिक संबंध हों, तो दोनों देशों को काफी मुनाफा हो सकता है।
अल्लाह की मेहरबानी है कि उसने हमें सांप, बिच्छू या बिल्ली नहीं बनाया, आदमी ही बनाया। अब इस आदमी से इंसान बनना हमारी जवाबदारी है। आतंकी इंसान नहीं होते। इंसान तो क्या, आदमी ही नहीं होते।
मुझसे मेरे दोस्त बार-बार पूछते हैं, हसन भाई आप ऐसे क्रांतिकारी विचारों को सामने लाते हैं, इससे कई लोग आपसे नाराज हैं। आप को मरने का खौफ नहीं है? तो मेरा जवाब सीधा और सरल है। मेरी उम्र पाकिस्तान में रहने वाले लोगों की अपेक्षा दो दशक अधिक है। मैं औसत उम्र से अधिक जीत चुका हूं, तो फिर अब काहे का डर?
आज पाकिस्तान तबाही के करीब है। गांधी जी के शब्दों में कहें तो पाकिस्तान आज निति-नाश के रास्ते पर है। उन्होंने इन दो शब्दों का अपनी किताब में एक शीर्षक के रूप में प्रयोग किया है। आज पाकिस्तान का अस्तित्व ही खतरे में है। यह देश सर्वनाश की धार पर लटका हुआ है, क्योंकि उसका निर्माण ही धिक्कार और क्रूरता की बुनियाद पर हुआ है।
डेढ़ से दो दशक में पाकिस्तान की उम्र खत्म हो जाएगी। मेरी बात यदी समझ में नहीं आती, तो पाकिस्तान में ही बनी फिल्म 'खुदा के लिए' देख सकते हैं, जिसमें एक प्रगतिशील मुल्ला की भूमिका नसरुद्दीन शाह ने निभाई है। इसी नसीरुद्दीन शाह को 'गांधी माय फादर' नाटक में गांधीजी की भूमिका निभाते हुए देखकर मैं भाव विभोर हो गया था। उनकी स्वाभाविक भूमिका को देखने के बाद उनके आभामंडल से मैं अभी तक मुक्त नहीं हो पाया हूं।
त्रयंबकः धार्मिक तीर्थ के साथ प्राकृतिक नजारे
शांति से सराबोर त्रयंबक कस्बा
महाराष्ट्र के अहम शहर नासिक से त्र्यंबकेश्वर ई लगभग 1 घंटे की है इस कस्बे की रंग रंग में अध्यात्म की महक महसूस की जा सकती है यहां पहुंच कर ऐसा लगता है कि यह कस्बा आस्था के लिए ही जीता है श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद एक अनोखी सी शांति इस कस्बे में गोली सी लगती है माथे पर त्रिशूल के आकार का टीका लगाए लोग देश के अलग-अलग कोने में समाए आध्यात्मिक आस्था के भाव को यहां आकर बिखेरते से मालूम होते हैं पहाड़ों से घिरा वह नदी किनारे बसा यह कस्बा प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है।
त्रिंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
यह समुद्री सतह से लगभग ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर बसा है यह मंदिर ब्रह्मगिरि नीलगिरी और काल गिरी नाम के तीन पर्वतों के बीच बसा हुआ है त्रिबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का जीर्णोद्धार नाना साहब पेशवा ने करवाया था काले पत्थरों से प्राचीन कला शैली में बने इस मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी देखने लायक है त्रिंबकेश्वर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक अहम ज्योतिर्लिंग माना जाता है कहा जाता है कि यह देश का अकेला ऐसा मंदिर है जहां भगवान ब्रह्मा विष्णु और शिव की एक साथ पूजा की जाती है।
गोदावरी का उद्गम स्थल ब्रह्मागिरी
गोदावरी का उद्गम स्थल ब्रह्मागिरी त्रंबकेश्वर का एक अन्य आकर्षण है पौराणिक मान्यता है कि त्रंबकेश्वर में मौजूद ब्रह्मागिरी पर्वत पर गौतम ऋषि के प्रयासों से गोदावरी का उद्गम हुआ इस पर्वत की तलहटी पर बने इस उद्गम स्थल से त्रिंबक कस्बे का सुंदर नजारा देखने को मिलता है इस जगह के ठीक सामने नजर आती है एक अनूठी परबतसर अंजना इस पर्वत को अंजनी पर्वत कहा जाता है माना जाता है कि इसी जगह पर हनुमान जी की माता अंजनी ने तपस्या की थी ब्रह्मगिरि पर्वत से गोदावरी तीन दिशा में बहती है पूर्व की दिशा में बहती धारा गोदावरी कहलाती है दक्षिण में बहने वाली वैतरणा और पश्चिम में बहने वाली गंगा कहलाती है।
त्रंबकेश्वर के कुंड
यहां चार अलग-अलग अकाउंट बने हैं इनमें से एक को गंगा सागर कहा जाता है यहां मौजूद मुख्य कुंड कुर्ता व्रत में हर 12 साल में एक बार कुंभ मेला लगता है सूर्योदय के बाद सुबह-सुबह इस कुछ आवर्त में स्नान करने में कितना आनंद आता है वह यहां आकर ही महसूस किया जा सकता है इसके अलावा रामकुंड और लक्ष्मण कुंड का भी खास महत्व है मान्यता है कि पूर्वजों की अतृप्त आत्माओं की अशांति के कारण होने वाले कालसर्प दोष को दूर करने के लिए त्रंबकेश्वर एक अकेला स्थान है
त्रंबकेश्वर कैसे पहुंचे?
नजदीकी हवाई अड्डा नासिक हवाई अड्डा है रेल मार्ग से त्रंबकेश्वर जाने के लिए नासिक किया मनमाड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ते हैं मनमाड से लगभग 3 घंटे और नासिक से करीब 1 घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है दोनों ही स्टेशनों से टैक्सी या ऑटो यहां पहुंचाने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहते हैं नासिक तक मुख्य शहरों से बस के जरिए भी आया जा सकता है
कोई राह पकड़ने से पहले मंजिल पता करें
हमेशा व्यस्त रहेंगे तो नाखुश कभी नहीं होंगे
जीवन में सब को सब कुछ नहीं मिलता और सभी के जीवन में कुछ सुखद के साथ कुछ दुखद होता है बस हंसी को आंसुओं से ज्यादा रखने की कोशिश करें आप सब को खुश नहीं कर सकते आलोचना को खुद पर हावी ना होने दें वह करें जिसे करने में आनंद आए गुस्सा ना पाले उनसे दूर रहे जो आपको ना खुश करते हैं कई रुचियां रखें हमेशा व्यस्त रहेंगे तो खुश रहेंगे
आपको यह पता होना चाहिए कि जाना कहां है
अगर आप नहीं जानते कि आप कहां पहुंचना चाहते हैं तो आप कहीं नहीं पहुंच सकते जैसे किसी यात्रा पर जाने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आप कहां जाना चाहते हैं उसी तरह आपको यह भी पता होना चाहिए कि आप आर्थिक क्षेत्र में आप कहां पहुंचना चाहते हैं तभी आप वहां तक पहुंच सकते हैं कोई मंजिल ही नहीं है तो उस दिशा में कैसे चलेंगे
ज्ञान का उपयोग कैसे करें यह महत्वपूर्ण है
अधिकतर प्रोफेसर के पास धन बहुत कम होता है वह ज्ञान के विशेषज्ञ होते हैं लेकिन ज्ञान के संगठन या उपयोग के विशेषज्ञ नहीं होते ज्ञान शक्ति है लेकिन यह शक्ति तब बनता है जब इसे संगठित किया जाए और एक निश्चित अंत तक निर्देशित किया जाए ज्ञान को प्राप्त करने के बाद उसे व्यवस्थित और उपयोग कैसे करें यह सीखना भी बहुत जरूरी होता है
सफलता के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचेंगे तो चीजों का आनंद लेना छोड़ देंगे
बुरे के लिए तैयार रहता हूं
मैं पिच पर ओवरकन्फिडेंट नहीं होता ना दबाव में रहता हूं बस खुद को बुरे के लिए तैयार रखता हूं मुझे यही माइंडफ्रेम सूट करती है हर इंसान अलग अप्रोच से हालात को हैंडल करता है जब खेलता हूं तो जोगन मेरी तरफ बढ़ती है उसी के बारे में सोचता हूं उस वक्त कुछ और सोच लूंगा तो गड़बड़ होगी
ज्यादा सोचना ठीक नहीं
पहले मैं सफलता को लेकर खूब सोचता था आउट होता तो घंटों वीडियो देखता क्लिप से जानने की कोशिश करता कि क्या गलती की खुद को और कंफ्यूज कर लेता मैंने खेल का आनंद लेना छोड़ दिया था यह आनंद ही चीजें ड्राइव करता है इसे खत्म कर देंगे तो आपका काम औसत हो जाएगा
कितने ही टैलेंटेड हो मेहनत तो करनी ही होगी।
मेहनत टैलेंट को हरा सकती है लेकिन टैलेंट मेहनत को नहीं हरा सकता।
लक्ष्य नहीं होगा तो आपको कुछ ड्राइव नहीं कर सकता।
जब हालात काबू में ना हो तो एनर्जी और वक्त नहीं बर्बाद करना चाहिए।
ऑफिस में पॉजिटिव डिजिटल कल्चर अपनाने के लिए यह उपाय करें
डाउन टाइम के लिए शांत जगह निकाले
मैनेजर ऑफिस में ही कर्मचारियों के लिए एक ऐसी जगह निकाल सकते हैं जहां वह काम और डिवाइस से ब्रेक लेकर कुछ समय एकांत में बिता सकें कुछ देर अकेले में बैठकर विचार कर सकें इस तरह के डाउनटाइम से कर्मचारियों को अपने डिफॉल्ट मोड नेटवर्क को एक्टिवेट करने में काफी मदद मिलती है इससे उन्हें जानकारियां और नए आइडियाज भी मिल जाते हैं
कर्मचारियों को फोन फ्री ब्रेक दे सकते हैं
कर्मचारियों का डाउन टाइम अगर फोन फ्री रखें तो बेहतर होगा तभी उन्हें डाउनटाइम का पूरा फायदा भी मिलेगा ज्यादातर कर्मचारी डाउन टाइम में भी अपने स्मार्टफोन साथ ही रखते हैं जबकि शोध बताते हैं कि जो कर्मचारी ब्रेक के दौरान भी अपने स्मार्टफोन साथ लेकर जाते हैं काम पर लौटने के बाद उनकी प्रोडक्टिविटी बहुत हद तक घट जाती है और ना ही उनमें पर्याप्त ऊर्जा दिखाई देती है
बातचीत के लिए ऐसे तैयारी की जा सकती है
ज्यादातर कर्मचारी अपने मैनेजर को तुरंत प्रतिक्रिया देने की जल्दी में रहते हैं फिर चाहे बातचीत काम के बाद ही हो वीकेंड पर या फिर छुट्टियों के दौरान हो लीडर चाहे तो आसानी से अपने कर्मचारियों के लिए सकारात्मक डिजिटल माहौल पैदा कर सकते हैं इसके लिए उन्हें केवल एक पॉलिसी बनानी होगी कि कब और कैसे कर्मचारियों से प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा सकती है
फोकस टाइम ब्लॉक करने के लिए कहे
बहुत से कर्मचारियों को लगता है कि अपना काम पूरा करने के लिए उन्हें ज्यादा समय नहीं मिल पाता है जिन कर्मचारियों को अपने लिए 55 मिनट भी मिलते हैं वह ज्यादा ऊर्जावान दोस्ताना मजेदार और स्मार्ट होते हैं कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्टिव बनाने के लिए उन्हें कैलेंडर पर फोकस टाइम ब्लॉक करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं
दुर्गा पूजा पंडालों में दिखेगी प्रकृति सौहार्द की झलक
बालीगंज में 76 साल पूर्व की झलक दिखेगी
बालीगंज के मेट्रोपोलिस इलाके के समाजसेवी संग पूजा के पंडाल का डिजाइन इस तरीके से किया जाएगा जिससे 1946 के दौर के उत्सव की झलक मिले। समिति के सचिव अरिजीत मित्रा ने कहा कि इसके माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर पूजा का थीम वृंदावन में राधा कृष्ण के मंदिर पर आधारित होगा पंडाल बड़ा और भव्य होगा
काम मे परफैक्ट किसे होना चाहिए- ड्राइवर या मैनेजर को?
सौभाग्य से हमें एक पेट्रोल पंप मिला। हमने पंप वाले को जगाने की कोशिश की। उसे उठने में देर लगी, फिर उसने कंप्यूटर चलाया, पासवर्ड लिखा, तब जाकर पंप करने वाली मशीन चालू हुई। इसमें 30 मिनट खर्च हो गए। मैं अपसेट हो गया और ड्राइवर से कहा कि वे लोग बहुत गैरजिम्मेदार हैं। कोई 25-26 साल के उस ड्राइवर को लगा कि उसने एक रात नहीं सो कर अपने मालिकों के लिए बड़ी कुर्बानी दी है। गैरजिम्मेदार शब्द सुनकर वह मायूस हो गया। जब हम वहां से निकले तो मैंने कुछ अच्छे शब्द कहकर उसे दिलासा देने की कोशिश की। लेकिन उसने एक डिवाइडर से गाड़ी टकरा दी, टायर फट गया और गाड़ी रुक गई। कार की मेरी वाली साइड क्षतिग्रस्त हो गई थी, पर हमें चोट नहीं आई। टायर बदलने हम नीचे उतरे। ड्राइवर के पास स्पेयर-टायर था, पर टूल्स नहीं थे। जब उसने अपने ऑफिस फोन लगाया तो उन्होंने बताया कोई और ड्राइवर टूल्स ले गया है। अब हम बीच सड़क पर खड़े थे और हर वाहन को हाथ दिखा कर रोकने की कोशिश कर रहे थे। आखिर एक मिल्कमैन वहां से गुजरी। उसमें छोटे बच्चे सवार थे, जो किसी गांव के स्कूल जा रहे थे। उन्होंने हमें जैक दिया, लेकिन पाना हमारी टायर के नट पर फिट नहीं बैठ रहा था। दो और गाड़ियां रुकी, पर उनका पाना भी फिट नहीं बैठा, क्योंकि नट घिस चुके थे। तब मेरे ड्राइवर ने जुगाड़ लगाई और पाने में कपड़ा फंसाकर स्क्रू खोले। आखिर 10:15 बजे मैं जोधपुर पहुंचा। पूरे रास्ते में ड्राइवर से बातें करता रहा, ताकि उसकी नींद ना लगे। वह बीच-बीच में गुटखा खाकर भी थूक रहा था और इससे गाड़ी दाएं-बाएं झूल रही थी।
देश में हर चौथे मिनट सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की जान जाती है। इसका मतलब है कि हर दिन 360 लोगों की सड़क हादसों में केवल इसलिए मौत हो जाती है, क्योंकि हमारे पास सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए अच्छी स्किल्स नहीं है। सड़क सुरक्षा के उपायों को अपनाने के बाद अब यह आंकड़ा डेढ़ लाख सालाना से घटकर एक 1.31 लाख हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की सड़क सुरक्षा परिषद बताती है कि पूरी दुनिया में सड़क हादसों में हर साल 13.5 लोगों की मौत हो जाती है।
फंडा यह है कि एक मैनेजर कुछ स्किल्स को काम करते हुए भी सीख सकता है, क्योंकि उसकी गलतियों से कंपनी के रेवेन्यू को थोड़ा सा नुकसान होगा। लेकिन एक ड्राइवर की गलती से किसी की जान जा सकती है। मैनेजर के बजाय एक ड्राइवर को अपना काम कहीं बेहतर तरीके से आना चाहिए।
हम क्या कहते हैं, इससे जरूरी यह है कि हम कैसे कहते हैं
हम क्या कहते हैं, इससे जरूरी यह है कि हम कैसे कहते हैं
शनिवार सुबह 3:30 बजे मेरी बेटी चाहती थी कि मैं उसे एयरपोर्ट छोड़ आऊं, क्योंकि उसे अर्जेंट यात्रा करनी थी और बारिश हो रही थीl मैं तैयार हो गया और चंद ही मिनटों बाद मेैं कार मे था| लेकिन जब हम कॉलोनी के मुख्य द्वार पर पहुंचे तो पाया कि वह बंद था| वॉचमन अपने सिक्योरिटी केबिन में बैठा सो रहा था| मैंने बेटी से कहा कि उसे जाकर जगा दे, क्योंकि उस समय हॉर्न बजाने से कॉलोनी के दूसरे सदस्यों को व्यवधान हो सकता था| बेटी ने बिना किसी एतराज़ के ऐसा ही किया| उसने पहले कार का दरवाजा खोला, फिर छाता खोला, फिर सिक्योरिटी गेट तक गई और वॉचमैन से अनुरोध किया कि वह मेन गेट खोल दे| उसने तीन बार से ज्यादा वॉचमैन भैया कहकर उस को जगाने की कोशिश की| अचानक वह हड़बड़ा कर उठा| उसके चेहरे पर अपराध बोध था वह दौड़ कर गया और गेट खोल दिया| इसके बाद वह मेरे पास आया और बोला, सॉरी सर, आंख लग गई| मैंने उससे कहा कि 3:30 बजे हर किसी की आंख लग जाती है, इसलिए चिंता मत करो| ऐसा कहकर हम वहां से चले गएो|
एयरपोर्ट तक 10 मिनट की यात्रा के दौरान मेरी बेटी ने मुझे एक वीडियो दिखाया, जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में घूम रहा था| उसमें एक लड़की ऑफिस में दूसरी से पूछ रही थी कि उसने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाली कोई पोशाक क्यों नहीं पहनी| जिस लड़की से यह पूछा गया था, उसने चार मिनटों तक बिना रुके यह ज्ञान दिया कि वह देशभक्त है, वहीं जिसने पूछा था उसे वह वीडियो में बताने का मौका ही नहीं मिला कि उसने यह क्यों पूछा था| वीडियो इस शुक्रवार को शेयर किया गया था, क्योंकि लंबे वीकेंड के चलते अधिकतर ऑफिस बंद थे| मैं पहले भी वह वीडियो देख चुका था, इसलिए मैंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाली पोशाक पहनने या तीन रंगों वाली सैंडविच खाने- जिसमें ऊपर गाजर की चटनी हो और नीचे हरी चटनी- से आप देशभक्त नहीं बन जाते हैं| देशभक्ति वह है जो तुमने अभी किया| इस समय हार्न नहीं बजा कर पूरी सोसाइटी को डिस्टर्ब नहीं करना और बेचारे सिक्योरिटी वाले पर चलाए बिना और उसे दोषी महसूस कराए बिना उसे जगाना|
कुछ दूर ड्राइव करने के बाद जब हम दूसरी तरफ से ट्रैफिक के गुजर जाने का इंतजार कर रहे थे तो अचानक हमने एक बिना साइलेंसर वाली बाइक पर तीन नौजवानों को हमें ओवरटेक करते हुए देखा| बाइक ना केवल शोर कर रही थी बल्कि वह लड़के भी जोरो से चिल्ला रहे थे| पीछे बैठे दो नौजवानों के हाथों में स्टैंड सहित एक बड़ा तिरंगा झंडा था, जिसे अच्छे से तह किया गया था| अगले टर्न पर मैंने गाड़ी का शीशा नीचे किया और उनसे पूछा कि क्या वे यह झंडा कहीं देने जा रहे हैं? जब उन्होंने कहा हां तो मैंने उनसे कहा कि अगर तुम को लगता है कि तिरंगा झंडा हमारा गौरव है तो समाज में अच्छा व्यवहार भी करो, जिससे हमारा गौरव और बढे| उन्होंने सिर हिलाया, मुस्कुराए और हमारी कार को ओवरटेक कर आगे चले गए| मैंने दूर से देखा कि अब वे अच्छी तरह और आहिस्ता से बाइक चला रहे थे, ताकि सड़कों पर जमा बारिश का पानी उछल कर दूसरी गाड़ियों पर ना जाए| अलबत्ता एक बाइक पर तीन लोगों का बैठना यातायात के नियमों का उल्लंघन है|
फंडा यह है कि अक्सर हम क्या कहते हैं या करते हैं, इसका महत्व इतना नहीं होता, जितना इसका कि हम उसी चीज को कैसे कहते या करते हैं| हमारे वो शब्द उन्हें अपना काम अलग तरह से करने को प्रेरित कर सकते हैं, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जा सकता है|
8 Ways To Practice & Promote Body Positivity
Call out body shamers
Ensure to call out people who body shame others to establish a sensitive outlook in everyone. Irrespective of how small or minor the comment is, do not ignore them.
Be healthier, not skinnier
Begin your fitness journey with a mind set of becoming healthy instead of skinny. Do not frame your fitness goals on what you see on the weighing scale.
Complement yourself
Every time a negative thought pops up in your mind about your body, neglect it with a compliment. Think about everything you love about yourself.
Complement others freely and frequently
One complement from a stranger can have a significant impact on someone's outlook on themselves do not hold back from complementing people and spreading positivity.
Stop comparing
It's a never ending, excruciating path that does not end. Also, comparing yourself to others is a fruitless exercise that is not based on any rational logic.
Surround yourself with positivity
Consume content that promotes body positivity. Interact with people who carry a similar mindset and promote body positivity.
Question the body heating mind set
Ask yourself if criticizing your body is helping you in a productive way. If you don't get opposite response, learn to accept yourself while working towards your fitness goals.
Positive affirmations
Make it a point to take a few minutes out of your day to recite body positive affirmations, like I respect my body and my body respect me and others.
8 Super Effective Ways To Motivate Yourself To Workout
Make your workout fun
Do workouts that you enjoy. It could be dancing or Zumba or yoga. You need not run on the treadmill daily to stay fit.
Make exerciseing a Priority
when we consider working out optional, we tend to skip it. Build a mind set wearing you consider workouts to be your priority.
Write down how you feel after exerciseing
write down how energy you felt or how the rush of and Orphan uplifted your gloomy mode after a short workout session.
Group workouts
when you work out with your friends or partner, it is less likely that you will skip it. Apart from that, group workout are fun, and thus, will help you remain consistent.
Personal rewards
Rewards to not translate into desserts or junk food. Make it a point to reward yourself by buying something expensive or favourite on your wish list when you complete a certain fitness goal to stay motivated.
Set goals
if you workout without setting goals or Moti monitoring your progress, you will not be able to get the benefits of workout regularly. Setting goals only increases your well and determination to achieve more.
Build a motivating environment
Surround yourself with people of similar mind set. Look for ways to increase physical activity in your daily routine. Find a spot where you feel the most motivated to exercise like a gym or a pak and visit regularly.
Be flexible
Make exercise a Priority but do not kill yourself with a visit schedule. There are some days when you genuinely cannot workout oying to other commitments. Don't be hard on yourself and take a break when you need to.
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खाली पेट करी पत्ता खाने के अनोखे फायदे
कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर करी पत्ते का सेवन करने के फायदों के बारे में तो सभी जानते हैं आज हम आपको बताने जा रहे हैं खाली पेट करी पत्ता खाने से क्या लाभ मिलते हैं विस्तार से जानने के लिए पढ़िए यह लेख
करी पत्ते के पोषक तत्व
कैल्शियम
फास्फोरस
आयरन
विटामिन सी
विटामिन ए
कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करे
करी पत्ते में एंटीऑक्सीडेटिव गुण होते हैं जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं इसके साथ ही है गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देते हैं
पाचन सुधारे
खाली पेट करी पत्ते का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है यह कब्ज एसिडिटी व अपच से छुटकारा दिलाता है आप इसे दही या छाछ के साथ भी ले सकते हैं
सूजन घटाए
करी पत्ता एंटी इन्फ्लेमेटरी व एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है इसे सुबह खाली पेट खाने से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की सूजन घटाने में मदद मिलती है
आंखों के लिए गुणकारी
आंखों की रोशनी में सुधार लाने के लिए आपको खाली पेट करी पत्ता खाना चाहिए इसमें आंखों को हेल्दी रखने वाले विटामिन ए के गुण होते हैं
त्वचा के लिए
करी पत्ते में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से आपकी त्वचा ग्लोइंग बनती है आप रोजाना सुबह खाली पेट पांच से सात पत्तियां खा सकते हैं
डायरिया में फायदेमंद
करी पत्ता कारबाजोले एल्कलाइन से भरपूर होता है इसे खाली पेट खाने से डायरिया से बचाव होता है
शाम में एक्सरसाइज करने से महिलाओं को मिलते हैं ये फायदे
बिजी लाइफ स्टाइल होने की वजह से अगर आपको सुबह एक्सरसाइज करने का समय नहीं मिल पाता है तो आप शाम में भी एक्सरसाइज कर सकती हैं आइए जानें इसके फायदे
सुबह में एक्सरसाइज करने से पहले बार मत करना होता है लेकिन अगर शाम में एक्सरसाइज कर रही हैं तो बार माफ करना जरूरी नहीं है क्योंकि आप पूरे दिन एक्टिव रहते हैं
दिन भर का काम घर ऑफिस आदि से मन अशांत हो जाता है वहीं अगर शाम में एक्सरसाइज किया जाए तो बॉडी के साथ मन को बड़ा आराम मिलता है
शाम में एक्सरसाइज से मन के साथ-साथ बॉडी को भी रिलैक्स मिलता है जिससे रात की नींद अच्छी होती है इससे आप सुबह बिल्कुल फ्रेश फील करेंगे
दिन भर के काम से हड्डियों में झनझनाहट और तनाव होता है ऐसे में अगर शाम में एक्सरसाइज किया जाए तो हड्डियों को मजबूती मिलती है
पूरे दिन के काम का भार शरीर और मन पर शाम में दिखता है ही है इसे दूर करने के लिए शाम में एक्सरसाइज एक बेहतरीन उपाय है इससे स्ट्रेस में आराम मिलता है
शाम में अगर एक्सरसाइज करना चाहती हैं तो एक्सरसाइज के एक-दो घंटे पहले और बाद कुछ भी ना खाएं
मन करता है टिकट आदि का एक्सरसाइज के बाद तुरंत सोने की कोशिश ना करें कम से कम एक-दो घंटे बाद ही बिस्तर पर जाएं
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