पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। कोलकाता में तो इस साल दुर्गा पूजा के दौरान धरती मां और सांप्रदायिक सौहार्द पर आधारित पंडाल सजाए जाएंगे। राज्य में हर साल आयोजक किसी एक विषय का चुनाव करते हैं। और उनके पंडाल, मूर्तियां और सजावट उस विषय की झलक पेश करते हैं। उत्तरी कोलकाता में काशी बोस लाने पूजा समिति के पंडाल और उसके अंदरूनी हिस्से इस बार माटी (पृथ्वी) पर आधारित होंगे। समिति के महासचिव सोमेन दत्ता ने बताया, धरती हमारे अस्तित्व से जुड़ी है और यह वही स्थान है जहां हम मृत्यु के बाद लौटते हैं। यह सृष्टि का भी प्रतीक है, क्योंकि पृथ्वी पर पेड़ पौधे उगते हैं दत्ता ने कहा कि इस बार पंडाल का साइज और भी बड़ा होगा, ताकि हजारों लोग दर्शन कर सकें। दुर्गा पूजा आयोजकों के मंच फॉर्म फॉर दुर्गोत्सव के पदाधिकारी दत्ता ने बताया कि पूजा समिति के सदस्य 1 सितंबर को यूनेस्को के सम्मान में एक रैली में भाग लेंगे। 'कोलकाता में दुर्गा पूजा' को पिछले साल दिसंबर में यूनेस्को ने विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की थी। इसके चलते इस बार यूनेस्को के प्रतिनिधियों को दुर्गा पूजा पंडाल समितियों की ओर से सम्मानित किए जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
बालीगंज में 76 साल पूर्व की झलक दिखेगी
बालीगंज के मेट्रोपोलिस इलाके के समाजसेवी संग पूजा के पंडाल का डिजाइन इस तरीके से किया जाएगा जिससे 1946 के दौर के उत्सव की झलक मिले। समिति के सचिव अरिजीत मित्रा ने कहा कि इसके माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर पूजा का थीम वृंदावन में राधा कृष्ण के मंदिर पर आधारित होगा पंडाल बड़ा और भव्य होगा
No comments:
Post a Comment