चूहे की सवारी ही क्यों करते हैं गणेश जी? आखिर इसमें छिपा है कौन सा संदेश? Ganesh Chaturthi 2022
चूहों के बारे में सोचने पर आपके मन में अपने आप कचरे, महामारी और अन्य बीमारियों के दृश्य आते हैं। चूहे संपत्ति के विनाश के साथ-साथ गंदगी से भी जुड़े माने जाते हैं। सवाल यह है कि फिर गणेश जी को हमेशा चूहे के साथ क्यों जोड़ा जाता है, जिसे प्यार से मुषक कहा जाता है?
लेकिन मेरे भतीजे का कहना है कि मूषक चूहा नहीं, बल्कि मूस है। चूहे घिनौने होते हैं, जबकि मुंस उनसे कहीं ज्यादा प्यारे होते हैं। प्यारे गणेश एक प्यारे मूस पर सवार होते हैं। सच में तो कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि मूषक मूस है या चूहा। विद्वान और अन्य लोग इसके बारे में गुढ संस्कृत ग्रंथों का उल्लेख करते हुए अंतहीन बहस भी करते हैं। जो भी हो, वह मूलतः एक कृतंक है, जिसके द्वारा अनाज खाने की वजह से किसान उसे अपना दुश्मन मानते हैं। गणेश मंगल-मूर्ति हैं अर्थात सभी शुभ बातों के मूर्त रूप। फिर एक कृतंक, जो इतना अशुभ माना जाता है, उनकी सवारी कैसे हो सकता है? तो इसमें क्या संदेश छिपा है?
मूषक उस कृतंक का प्रतीक है, जो हमारे जीवन में लगातार बना रहता है। यह उस समस्या का प्रतीक है जो इतनी छोटी है कि उसका पता लगाना भी मुश्किल है और जो हमें परेशान करती है। यह समस्या उस प्रेजेंटेशन जैसी है, जो हमारा बॉस कभी मंजूर नहीं करेगा; उस मुंहासे जैसी जो हमारी नाक में दम कर देता है; उस पड़ोसी जैसी जो हमेशा कचरा आपके दरवाजे के बाहर रखता है; या उस टपकते हुए नल जैसी जिसका किसी नलसाज के पास भी हल नहीं है। यह चाबियों का वह गुच्छा है, जो आपको घर से निकलते समय नहीं मिलता; या न्यायालय में वह मुकदमा है जो सालों से चल रहा है। यह हमारे जीवन के कृतंक हैं, लोभी चोर जो हमारे सुख को कुतर रहे हैं।
ऐसे व्यक्ति की कल्पना कीजिए जो आपके जीवन की सभी तकलीफदेह, चूहों जैसी समस्याएं हल करता है। हिंदुओं के लिए वे गणेश हैं। गणेश के विशाल पेट के चारों ओर एक नाग लपटा होता है। नाग चूहों को खाता है, जिस कारण अनाज कम खाया जाता है और फसल सुरक्षित रहती है। इसलिए नाग किसान का मित्र है।
गणेश की कृपा से समस्याएं दूर होती हैं और लोग समृद्ध व शक्तिशाली बनते हैं। हम सहजता से गणेश की कल्पना कर सकते हैं, उन्हें चूहा या मूस रूपी समस्या को उसकी पूंछ से पकड़कर उसे घसीटते और उस पर बैठते हुए, ताकि वह हमें और परेशान ना करें। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि गणेश बहुत लोकप्रिय देवता हैं, जो हमें तंग करने वाले चूहों से राहत दिलाते हैं। वह विघ्नों को दूर करने वाले अर्थात विघ्नहर्ता है। चूहे तेजी से प्रजनन करते हैं और परिणामस्वरूप उर्वरता के प्रतीक भी हैं। गणेश हमेशा उर्वरता के प्रतीकों से जुड़े हैं। उदाहरणार्थ, दूर्वा या दूब घास जो उखाडने के बाद भी बढ़ती है। यदि पौधों में उर्वरता का प्रतीक दूर्वा है। तो जानवरों में चूहा उस का प्रतीक है। चीन और जापान में चूहों को उर्वरता, बच्चों और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
चूहे अथक होते हैं। अनाज तक पहुंचने के लिए वे सबसे मुश्किल बाधाओं को भी पार कर लेते हैं। इसलिए वे लोभ के प्रतीक भी हैं। वे अथक जमाखोर हैं। इस प्रकार चूहों के दोनों सकरात्मक (उर्वरता/अथक होना) और नकारात्मक (चोरी करना/महामारी फैलाना) पहलू होते हैं। गणेश के मूषक के ऊपर विराजमान होने से भक्तों तक केवल सकारात्मक पहलू पहुंचते हैं, जबकि नकारात्मक पहलू उनसे दूर रहते हैं।
गणेश की प्रतिमा संभवत: समृद्धि, शक्ति और शुभता की भावनाएं जगाती हो, जिन्हें हासिल करने के लिए उर्वरता महत्वपूर्ण है। लेकिन उनका मूषक हमें आत्मसंतुष्ट न बनने की याद दिलाता है: चूहा भले ही उर्वर और अजेय हो और हमारे धनी बनने में योगदान करता हो, लेकिन वह चुपचाप, गुप्त रूप से हमारी नैतिकता, हमारे मूल्यों और स्पष्टतया हमारे पूर्ण जीवन की नींव को कुतरने में भी सक्षम है।
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी से इन 4 राशि वालों के शुरू होने जा रहे हैं अच्छे दिन, मां लक्ष्मी का भी मिलेगा आशीर्वाद!
Ganesh Chaturthi 2022: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 31 अगस्त को शुक्र का सिंह राशि के साथ युति होने वाली है. इस दिन गणेश चतुर्थी भी है. ग्रहों की युति का विशेष लाभ कुछ राशियों को मिल सकता है.
Ganesh Chaturthi 2022: Shukra Rashi Parivartan: ज्योतिष में शुक्र को शुभ ग्रह माना गया है. इसे ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि, धन, प्रेम, वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है. ये वृषभ और तुला राशि के स्वामी हैं. मीन राशि में ये उच्च के होते हैं जबकि कन्या राशि में नीच के माने गए हैं. ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार 31 अगस्त, बुधवार को शुक्र का गोचर (Shukra Gochar 2022) होने जा रहा है. इस दिन गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) भी मनाई जाएगी. गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2022) के दिन शुक्र देव कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि (Leo Zodiac) में प्रवेश करेंगे. ऐसे में गणेश चतुर्थी के दिन शुक्र का राशि परिवर्तन (Shukra ka Rashi Parivartan) बेहद खास माना जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र के जानकारों की मानें तो गणेश चतुर्थी के दिन से कुछ राशि वालों के अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं. आइए जानते हैं कि ये राशियां कौन-कौन हैं
मेष
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक मेष राशि के लिए शुक्र का गोचर लाभकारी साबित होगा. शुक्र गोचर की अवधि में सुख-समृद्धि के साथ-साथ खुशियां प्राप्त होंगी. पिता से आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा. परिवार के किसी सदस्य से कोई उपहार मिल सकता है. आर्थिक निवेश के लिए समय अनुकूल रहने वाला है
वृषभ
इस राशि से संबंधित जातकों के लिए शुक्र का राशि परिवर्तन खास साबित होने वाला है. शुक्र गोचर की पूरी अवधि में आर्थिक रूप से तरक्की होगी. साझेदारी वाले काम में आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. इसके साथ ही इस दौरान मान-सम्मान में बढ़ोतरी हो सकती है. संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है.
सिंह
शुक्र का राशि परिवर्तन सिंह राशि के लिए खास रहेगा. इस दौरान जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा. शुक्र गोचर की अवधि में नए जॉब का ऑफर मिल सकता है. जो लोग नौकरी में उनकी सैलरी में वृद्धि हो सकती है. आर्थिक स्थिति पहले से सुदृढ़ होगी. करियर तरक्की का अवसर मिलेगा.
कुंभ
शुक्र को गोचर से कुंभ राशि के जातकों के जीवन में खुशियां आएंगी. गोचर की अवधि में दांपत्य जीवन सुखद रहेगा. बिजनेस में आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी. ऐश्वर्य के साधनों की वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में तरक्की हासिल कर सकते हैं. अधिकारियों का सकारात्मक सहयोग मिलेगा. व्यापारियों के कामकाज को गति मिल सकती है.